Akhil Bhartiya Netrahin Sangh was established by S/ Shri G.S. Sardar and M.P.S. Rathore in the year 1960. Shri M.P.S. Rathore, who was Visually Impaired, was looking after the Institute in the capacity of General Secretary till his death i.e. Oct. 2013. He was aiming to establish SUCH Institute for the Blinds which will provide them to lead a respectable life. This Institute was got registered in 1962. The Blind inmates were given training for Chair Recanning, Chalk making and Candle making with the only resources of General Public Donations. The products of this Institute were in great demand as the purity in material was the main priority for the Institute. In the year 1984, the No. of students (both boys &girls) increased and it compelled the Administration to start ‘Residential School for the Blinds’. In this School, students from Nursery to Eighth standard were given education as per CBSE Syllabus along with technical education of Candle Making, Chair Re canning is provided. Students were also given Music training i.e. (SHASTRIYA SANGEET). At present about 85 Boys & Girls is getting education up to Class XII. Students who give good response in class VIII also get enrolled for CBSE (Open School) in X and XII classes, so that, students may get good education. In addition to regular study, students are also being taught PAPER BAG WORK, ARTIFICIAL FLOWER MAKING, and COMPUTER TRAINING from the starting stage of their career. Rathore Ji had a dream that the Blind students be made Self Dependent, so that, they should be able to earn their livelihood at their own, even if they don’t get any service. This is the only reason that the students of this Institute are working in Railway, Banks, and Govt. schools & at other important places. The new mile stone in the life of Blinds is to learn Yoga. The training of Yoga is being provided by a renowned Social Yoga Activist. The Students have proved their worth in the programme organized by Door Darshan in ‘Meri Awaz Suno’. The Blind students of this Institute are grabbing the opportunities if offered to them with their utmost devotion in the field, whatsoever it may be. …/2 : 2 : The students of Akhil Bhartiya Netrahin Sangh are trying to prove themselves up to the mark in the every field as per their capacity. This Institute is fully depend on the Public support as no Govt. Grant is being received for the Visually Impaired students i.e neither from Central nor from state Govt. We hope that more and more public support will come from every corner in the years to come and the students of this Institute will prove them up to the mark with their sincerity, devotion & learning the art to earn their livelihood in an honorable and respectable way. Some of our students have been teaching in Govt. Schools. Shri Suraj Prakash got appointment in Kendriya Vidyalaya, Shri Ramesh Chander Rathore in Defence, Shri Saurabh in a Nationalized Bank and one of our brilliant student Mr. Dhankar has been working IN Rajdhani College as a Professor. Some other students were selected for Central Govt. jobs after clearing S.S.C. Examination. Our Motto is to see that ‘No Blind should go for begging’. May God give us strength and courage to help these’ Differently Able Students’.

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इस संस्था की स्थापना में स्वर्गीय सर्वश्री जी एस सरदार एवं एम पी एस राठौर जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है! सन 1962 में इसे विधिवत सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट में पंजीकृत किया गया. वर्ष 1966 में इस संस्था ने श्री एम पी एस राठौरजी भूतपूर्व महासचिव के सराहनीय मार्ग दर्शन में शैक्षिक एवं वव्यसायिक प्रशिक्षण की गतिविधियों को अपनाया. श्री राठौर जी के निर्देशन में ही इस संस्था ने दृष्टिहीनों के लिए इस सुन्दर एवं विशाल भवन का निर्माण किया, तब से यह संस्था सुचारू रूप से कार्य करती हुई दृष्टिहीनों के विकास के लिए नवीन अवसर खोजने की दिशा में निरंतर प्रगतिशील है ! वर्ष 1986 से नर्सरी से आठवी कक्षा तक सी बी एस ई के पाठ्यक्रमानुसार आवासीय स्कूल के रूप में शिक्षा प्रदान की जा रही है ! इसके साथ-साथ गायन एवं वादन में पारंगत होने का अवसर भी प्रदान किया जाता है ! उन्हें कुर्सी बुनना, मोमबत्ती बनाना, संगीत, ब्रेल की आधारभूत शिक्षा प्रदान की जा रही है ! संस्था की एक नई उपलब्धि कंप्यूटर प्रशिक्षण का कार्यक्रम भी है ! इसके लिए एक कंप्यूटर प्रशिक्षित ब्लाइंड टीचर भी है जो उन्हें इसकी ट्रेनिंग देते है !
विधालय को मान्यता दिलवाने का प्रयास जारी है ! डिपार्टमेंट की मांग के अनुसार फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट एंड सर्टिफ़िकेट फ्रॉम दिल्ली जल बोर्ड से लेने के लिए ओन लाइन पत्र व्यवहार किया गया है.
हम उन समस्त दानदाताओ के आभारी है जिन्होंने धन एवं सामग्री के द्वारा अपना पूरा सहयोग दिया है जबकि सरकार से वर्ष 2008 के बाद कुछ भी अनुदान राशि प्राप्त नहीं हुई है ! हम उन सब लोगो के भी आभारी है जिन्होंने संस्था के बच्चो को स्पांसर किया है और प्रति माह अपना पूरा अंशदान नियमित रूप में दे रहे है ! वर्ष 2014-2015 में लगभग 1200 सदस्यों ने अपना अंशदान प्रति माह दिया है जिससे हम अपने सभी खर्चो को बिना किसी रूकावट के पूरा करने में समर्थ रहे है ! हम उन सभी के प्रति भी अपना आभार प्रकट करते है !
स्वर्गीय श्री राठौर जी के मार्गदर्शन में जो प्रोजेक्ट राजस्थान में लगाया गया था उसकी एन.ओ.सी. प्राप्त हो गयी है, जमीन कन्वर्जन का कार्य चल रहा है तथा जिसके प्राप्त होने पर शेष कार्यवाही की जाएगी ! राजस्थान में इस संस्था का कार्य हमारे कार्यकारी सदस्य श्री बजरंग सिंह राघव जी की देख रेख में सुचारू रूप से चल रहा है जोकि राजस्थान के प्रतिकूल मौसम में भी इस संस्था के लिए अभूतपूर्व योगदान दे रहें हैं, जिसके लिए हम उनके भी आभारी है !
हम श्री ओ पी बब्बर जी के ह्रदय से आभारी है जिन्होंने अपना बहुमूल्य समय देकर इस संस्था की प्रगति में अपना पूर्ण योगदान दिया है ! श्री एम पी एस राठौर जी के आकस्मिक निधन के बाद श्री बब्बर जी और भी सक्रिय रूप में संस्था को अपना अभिष्ट सहयोग पूर्ण निष्ठां के साथ निरंतर दे रहे है !
हम भगवान से बब्बर जी की दीर्घायु की कामना करते है और आशा करते है कि उनका प्रेरक आशीर्वाद और प्यार हमें आगे भी यथावत मिलता रहेगा !
संस्था में विधार्थियों को रिदमिक और आर्टिस्टिक योगा के साथ योगा का भी प्रशिक्षिण दिया जा रहा है. हमारे विधार्थियों ने एस डी पब्लिक स्कूल में प्रदर्शन द्वारा आयोज़कों एवं समस्त दर्शकों की यह सराहना प्राप्त की कि किस प्रकार दृष्टिहीन बच्चे इतना बढ़िया योग का प्रदर्शन कर रहे है. इसके लिए इनके योग प्रशिक्षक श्री हेमंत शर्मा के हम ह्रदय से आभारी है जिन्होने इन बच्चो को निशुल्क एवं निष्ठापूर्वक प्रशिक्षण देकर सराहनीय कार्य किया है !
हम डॉ. विनोद खेत्रपाल जी के अत्यंत आभारी है जो संस्था के बच्चो के स्वास्थय की नियमित जाँच एवं बीमारियो का निशुल्क उपचार नियमित रूप में करते आ रहे है !.
हम एल & टी कंपनी और पंजाब नेशनल बैंक के भी आभारी है जिन्होंने मोमबत्ती बनाने की मशीन बच्चो के लिए दान में दी जिससे की बच्चो को मोमबत्ती बनाने के लिए आसानी हुई और हमारे उत्पादन में भी वांछित वृद्धि हुई! इन्होने भविष्य में और भी योगदान का आश्वासन दिया है !
हम सर्वश्री बख्शीजी, चौधरीजी, भालचंदजी एवं अमृतलालजी के भी आभारी है जिन्होंने इस संस्था के बच्चो के लिए अपना निशुल्क बहुमूल्य समय देकर इन्हे प्रशिक्षित करने में अपना विशेष योगदान दिया है !
इस संस्थान के सभी छात्र छात्राएं, कर्मचारी एवं शिक्षक वर्ग व कार्यकारणी सदस्य इस संस्था से जुड़े सहयोगियों व शुभचिंतको के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते है !

देवेन्द्र सिंह राठौर
महासचिव

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  • To help the visually handicapped children without distinction of caste, color and creed, to become independent and useful citizens of the country
  • To give them training of skilled artisans of the work suitable to their caliber and education to make them useful and independent citizens. Computer Literacy and to promote I.T. i.e. Information Technology accessible for the Visually Impaired persons. In addition to that job oriented handicrafts and arts-such as canning, candle making, Aggarbatti & Dhoop, vocal music, typing and all other purposeful handicrafts etc.
  • To prepare the visually handicapped children for adoption of suitable career and employment with Private, Public and Govt. Organization.
  • To establish or acquire for above purpose proper work centers, training centers and equip then with proper tools.
  • To promote aid, help and develop the interest of the visually handicapped in the Union Territory of Delhi in particular and all over India in all possible ways.
  • To initiate in getting employment to visually impaired as per their qualifications and to promote all other activities for the furtherance of the cause of the visually impaired and to establish and manage work centre, library, educational and cultural institutions for the welfare and rehabilitation of the visually impaired.
  • To raise funds by carrying on work of the institution through government, special organization, firms/ individual and all other Legitimate means available.
  • To work as Non-official body mainly dependent on public support for carrying on its aims and objects of providing education and training of skilled artisans as per caliber of visually impaired.
  • To try and discourage begging among the younger generation of the visually impaired and particularly those under training of this institute.
  • To subscribe, support or organize visually impaired welfare schemes and for that purpose to arrange medical aid, open welfare centers and promote common provident fund and gratuity by place with or without assistance of the Government and other Non Government Organizations.
  • To do all things as are incidental and conductive to the attainment of the above objects.
  • To establish shelter workshops to promote the Cottage Industry.
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